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ISSN 2292-9754

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03.19.2017


आज तिरंगे को देखा

आज तिरंगे को देखा तो जख़्म पुराने याद आये
जलियाँ वाला याद आया तोपों के निशाने याद आये

हर और तबाही बरपा थी ज़ुल्म ढहाया जाता था
हुस्न के हाथों आशिक़ के ख़्वाब मिटाने याद आये

अपने पीछे दौड़ रहे उस बालक को जब देखा तो
तुम याद आये और तुम्हारे साथ ज़माने याद आये

फूटी कौड़ी भी ना दूँगा जब भी कोई कहता है
कौरव-पांडव वाले तब ही सब अफ़साने याद आये

टपटप टपके थे आँसू तब "हिन्दोस्तां" की आँखों से
अपनों के हाथों अपनों के क़त्ल कराने याद आये


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