गंगाधर शर्मा "हिन्दुस्तान"

दिवान
आज तिरंगे को देखा
चाँद बोला चाँदनी
चाहे तो पीर-पयंबर-कि कलंदर देखो
जो जहाँ भी जहां से उठता है
प्यार से रोशन ख़ुदाया
बज़्म में गीत गाता हुआ कौन है
मक्कार चोर धूर्त
ये मस्त हुस्न तेरा
शमशीर हाथ में हो