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| 05.31.2008 |
| हवा-ए-शहर
यहाँ किस तरह चली बाबा डॉ. फ़रियाद "आज़र" |
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हवा-ए-शहर यहाँ किस तरह चली बाबा
कि गाँव जलने लगा है गली गली बाबा दरख्त क्यों हैं सरासीमगी के आलम में मची है कैसी परिन्दों में खलबली बाबा न जाने कैसा बिछाया था जाल चोरों ने कि आज फँस गया सिमसिम में खुद अली बाबा ये रात यूँ भी हमें जाग कर बितानी है कहानी कोई सुनाओ बुरी - भली बाबा यहाँ तो सर ही नहीं सारा शहर ज़द में है बनाई किस ने सियासत की ओखली, बाबा हिनाई रूह चिताओं के पास घूमती है ये किसका जिस्म जला आज सन्दली, बाबा |
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