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| परिचय | |||||
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| नाम : |
फ़रियाद अली |
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| साहित्यिक नाम : | डॉ. फ़रियाद
"आज़र" |
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| संप्रति : | अध्यापन | ||||
| प्रकाशित पुस्तकें : | ख़िजाँ
मेरा मौसम - 1996 बच्चों का मुशायरा - 1998 किश्तों में गुज़रती ज़िन्दगी - 2006 कुछ दिन ग्लोबल गाँव में - 2007 |
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ग़ज़ल अरबी से फारसी और फारसी से उर्दू में परम्परागत
तौर पर आई। ग़ज़ल का शाब्दिक अर्थ है औरत से बात करना या औरतों के बारे में
बात करना। एक अर्से तक ग़ज़ल अपने इसी रूप में लोकप्रिय रही लेकिन वक़्त के
साथ ज़िन्दगी का हर मसला ग़ज़ल ने अपने अन्दर समो लिया । इसकी इसी ख़ूबी
ने ग़ज़ल को आज सारी दुनिया में लोकप्रिय कर दिया। आज ग़ज़ल दुनिया की हर ज़बान
में लिखी जा रही है। ग़ज़ल को आज उर्दू शायरी की आबरू कहा जाता
है। मीर, ग़ालिब के बाद इस दौर में उर्दू
ग़ज़ल के महत्वपूर्ण शायरों में बशीर बद्र,
अहमद फराज़, शहरयार, इफ्तखार
आरिफ़, निदा फ़ाज़ली,मुज़फ्फर
हनफी, फरियाद “आज़र”
आदि बेशुमार नाम लिये जा सकते हैं। |
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| URL | http://www.aiwan-e-ghazal.com | ||||
| ई-मेल : | fariyadazer@aiwan-e-ghazal.com | ||||