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04.06.2008
 

सियासत
फ़ज़ल इमाम मल्लिक


कुछ नया और अच्छा करने की एक लौ उसके भीतर हमेशा सुलगती रहती थी। बस अचानक ही एक दिन वह सत्ता के शीर्ष पर जा पहुँचा। उसे लगा कि उसकी इच्छाओं को पर लग गए हैं। उसने देश और समाज की तस्वीर बदलने की ठानी... मंत्रियों और अधिकारियों के साथ पहली ही बैठक में उसने अपने इरादों को उनके सामने रखा.... लेकिन दुनिया को बदलने का उसका सपना, उसके इरादे पूरे नहीं हुए... अपने इरादों को वह अमली जामा पहनाता इससे पहले ही उसके साथियों ने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया....।


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