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| 02.26.2008 |
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मुसलमान |
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स्कूल में
होने वाले नाटक के लिए अहमद सर बच्चों में रोल बाँट रहे थे.... रवि.... तुम
नाटक में मुसलमान बनोगे....
’नहीं सर
मैं मुसलमान नहीं बनूँगा...’ रवि ने डरते-डरते कहा....।
अहमद सर
अचंभित.... रवि ने इससे पहले तो कभी किसी बात से इनकार नहीं किया था....
’आख़िर क्यों...?’
’मुसलमान
ख़राब होते हैं....लोगों को मारते हैं......’ नन्हे रवि ने बहुत ही मासूमियत
से कहा।
अहमद और
भी परेशान... ’किस ने कहा तुमसे....मुसलमान ख़राब होते
हैं...’
’हमारे घर
के पास एक अंकल हैं..... उन्होंने कहा।’ रवि ने उसी मासूमियत से जवाब दिया।
परेशान
अहमद ने रवि से पूछा...’मैं कैसा लगता हूँ तुम्हें....?’
’आप तो
हमारे फ़ेवरिट सर हैं... बहुत अच्छे...’ रवि ने बिना हिचके कहा।
’लेकिन
मैं तो मुसलमान हूँ.....’ अहमद ने रवि से कहा। अंकल कितने झूठे हैं ..... अब रवि की आँखों में हैरत थी। |
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