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03.19.2008
 

भविष्यवाणी
फ़ज़ल इमाम मल्लिक


सड़क किनारे बैठे तोतो वाले को वह रोज़ ही देखता..... लोग जमा होते..... तोते वाला तोते का पिंजड़ा खोलता और तोता चोंच से एक कार्ड निकालता..... तोते वाला सामने बैठे व्यक्ति का भविष्य बताता..... पैसे लेता और किसी दूसरे ग्राहक का इंतज़ार करता.....

एक दिन वह भी तोते वाले के पास पहुँचा..... तोते वाला उसे देख कर मुस्कुराराया..... वह भी मुस्कुराया..... तोतो वाले ने पिंजड़े की तरफ़ हाथ बढ़ाया तो उसने उसे रोक दिया..... नहीं मुझे अपना भविष्य नहीं जानना है.....

तोते वाले की आँखों में हैरत उभरी.....तो फ़िर.....?

मैं तो तुम्हारा भविष्य बताना आया हूँ.....

तोते वाले की हैरत बढ़ी..... मेरा भविष्य.....?

हाँ, तुम्हारा.....खुद को देखा है तुमने..... वक़्त पर ढंग से भोजन नहीं किया और अपना इलाज नहीं करवाया तो तुम्हारा राम नाम सत्य हो जाएगा..... तुम्हें पीलिया है.....

तोते वाले की आँखों में खौफ़ की इबारत दिखाई देने लगई..... लेकिन आपने कैसे जाना..... कोई ज्योतिषी तो नहीं हैं आप.....

पागल हो तुम..... मैं भविष्यवक्ता नहीं डाक्टर हूँ।

पिंजरे के खुले दरवाज़े से तोता बाहर आया और उसने एक कार्ड उठाया..... लेकिन उसे पढ़ने की हिम्मत अब तोते वाले में नहीं थी। 


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