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05.04.2008
 

बाज़ीगर
फ़ज़ल इमाम मल्लिक


बाज़ीगरी में उसे महारत हासिल थी... हाथ की सफ़ाई से वह ऐसे-ऐसे खेल दिखाता कि लोग हैरतज़दा रह जाते... पर एक दिन अचानक ही सब कुछ कहीं थम सा गया.... उसने बहुत कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ....। सारे खेल-तमाशे धरे के धरे रह गए... वक़्त की बाज़ीगरी ने आज उसे मात दे दी थी।


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