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10.29.2007

 
परिचय  
 
नाम :

डॉ. फकीरचंद शुक्ला

जन्म : २१ सितम्बर १९४४
शिक्षा :

एम.एस-सी बायोकेमिस्ट्री, पी-एच.डी फूड टैकनालोजी

संप्रति : सेवा निवृत प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष फूड टैकनालोजी, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना
प्रकाशन और
पुरस्कार :

 डॉ.फकीरचंद शुक्ला सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक तथा विख्यात लेखक हैं। अब तक कहानी, नाटक, बाल-साहित्य तथा आहार तथा पोषण विज्ञान पर इनकी तीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। अनेकों राष्ट्रीय तथा राज्य पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. शुक्ला को हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिलेनियम अवार्डमिला था। विज्ञान को लोकप्रिय बनाने हेतु शिरोमणि लेखक पुरस्कार मिला था जिसके अन्तर्गत एक लाख रुपया नकद तथा गोल्ड मैडल प्रदान किया गया था। नाटकों की पुस्तक जोत से जोत जलेके लिए मोहन राकेश अवार्ड मिला था जबकि नई सुबहको सर्वोत्तम कहानी- संग्रह का सम्मान प्राप्त हुआ था। इनके लिखे नाटकों का कई बार स्टेज पर मंचन भी हुआ है तथा दूरदर्शन द्वारा प्रसारित भी हुए हैं। डॉ. शुक्ला स्वयं भी नाटकों में अभिनय करते हैं। कन्नड, तेलुगु, मराठी, गुजराती, सिंधी, मल्यालम, तमिल इत्यादि भाषाओं में इनकी कहानियों के अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। इन्होंने कई वैज्ञानिक नाटक भी लिखे हैं जिन का दूरदर्शन द्वारा प्रसारण भी हुआ है तथा मंच पर भी कई बार खेले गये हैं। हाल ही में प्रकाशित इनकी पुस्तक निरोग रहने के लिए आहार आजकल काफी चर्चा में है। विषपान नामक इनका कहानी-संग्रह काफी चर्चित रहा है। ढाक के तीन पात नामक इनके हास्य-नाटक ने काफी लोकप्रियता अर्जित की है।
डॉ.शुक्ला को अब तक ९ बार नैशनल अवार्ड, अलग-अलग राज्यों से १५ स्टेट अवार्डज, पंजाब सरकार द्वारा पंजाब रत्न अवार्ड इत्यादि कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

सम्पर्क : fcshuklaldh@yahoo.co.in