| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 09.05.2007 |
|
प्रिय भाई! प्रिय आलोचक! |
|
एक आवाज़ है,
बहुत सधी,
लेकिन मौन
एक प्रश्न है यही
समझ यह भी आता है
और जो वह और वह भी
और यूँ जाने अनजाने
कुछ समझे |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|