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ISSN 2292-9754

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01.12.2016

 

बूढ़ी माँ
दिविक रमेश


बूढ़ी माँ ने धोकर दाने
आँगन में रख दिए सुखाने
धूप पड़ी तो हुए सुहाने
आई चिड़ियाँ उनको खाने

आओ बच्चो आओ चलकर
बूढ़ी माँ की मदद करें हम
चलो उड़ा दें दानों पर से
बजा बजा कर ताली हम तुम

वर्ना सोचो क्या खाएगी
वह तो भूखी रह जाएगी
चिड़ियों की यह फौज नहीं तो
सब दानें चट कर जाएगी।

आओ बच्चो आओ चलकर
बूढ़ी माँ का काम करें हम
नहीं हैं बच्चे उनके घर में
चलो न चलकर काम करें हम
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