दिविक रमेश


कविता

एक आश्रम अशान्त
एक भारतीय पत्र मित्र इनद के नाम
उसने कहा था
कविते!
काश
खुशी
गुलाम देश का मजदूर गीत
जाइये-आइये
डर
प्रिय भाई! प्रिय आलोचक!
पुन्न के काम आये हैं
यह कैसी ज़िद है
सोचूँ
हक की तहकीकात
हर कहीं सब कहीं

आलेख

समकालीन साहित्य परिदृश्य : हिन्दी कविता
भेंटवार्ता
बालस्वरूप राही : नई चेतना एवं दृष्टि से सम्पन्न एक ऊर्जावान बाल-कवि
पुराने नाम याद हैं, शक्लें बदल गई हैं‘ - कवि त्रिलोचन (शास्त्री)

बाल-साहित्य

कविता

चलो सुनाओ नयी कहानी
नहीं चाहिए सीख बड़ों की
बूढ़ी माँ
पुस्तक

कहानी

झपकी
लालच की हार
बिना बताए
छुड़ाना साँड़ का
बेचारा गप्पी

 संस्मरण

वे मेरे घर से मिलने आये थे