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ISSN 2292-9754

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12.31.2015


वेतन आयोग

उस दिन भी जब मैं अपने किसी काम से सरकारी कार्यालय पहुँचा तो हमेशा की तरह सारी कुर्सियाँ खाली पड़ी थीं। तभी मेरा ध्यान बगल के कमरे की ओर चला गया जहाँ बैठे सभी कर्मचारी वेतन आयोग पर ज़ोरदार बहस कर रहे थे।

उसी समय मेरा ध्यान पास खड़े एक अधेड़ उम्र मज़दूर ने खींचा जो कह रहा था, "भगवान जाने घर कैसे चलेगा? शायद आज भी पूरी दिहाड़ी ख़राब हो जायेगी।"


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