अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
12.31.2015


अच्छे दिन

उस दिन मैं सुबह घर से निकला तो देखा कि 8वीं-9वीं में पढ़ने वाला एक लड़का मेरे आगे-आगे चल रहा था। थोड़ी देर बाद खाँसी के कारण उसकी थूकने की इच्छा हुई; वह रुका; नाली के पास गया और नाली में थूककर आगे बढ़ गया।

ऐसा देखकर मेरे मन में सुखद अनुभूति हुई और ख़्याल आया, "अच्छे दिन आ रहे हैं।"


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें