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03.06.2009
 

शादी
दिनेश ध्यानी


मेरी शादी
तेरी शादी
इसकी शादी
उसकी शादी।
किससे?
कब?
कैसे?
क्यों?
होगी
शादी।

शादी
कैसा घर?
कैसा वर?
कैसी होगी
सास-जिठानी?
कैसी होगी
रीति-नीति
अरु कैसी
होगी प्रीत निभानी?

शादी
बिन दहेज
या दहेज संग?
या होगी
लत्ते गहनों से
होगी या
पैसे पत्तों से
या होगी
सच्चे रिश्तों से?

शादी
जब
मेरी-तेरी
शादी है
तब मैं ही क्यों
तेरे घर
तू भी आ सकता
है मेरे घर?

क्यों मैं लड़की
अरु तू लड़का
इसीलिए
मैं ही आती हूँ
तू भी तो
मेरे जैसा है
फिर क्यों मैं ही
पिस जाती हूँ
रिश्तों-नातों
अपने पराये
रीति-नीति
सब मुझपर ही
क्यों?

बन्धन
अनुबंध
आशा
अभिलाषा
लालच
अनुराग
भाग
पग
हमारे
उनके
इनके
इस घर के
ऐसे ही हैं
कम दहेज
ना अक्ल सिखायी
ना कछु तुझको
बात बताई
सब
मेरी खातिर क्यों?

क्या मैं
लड़की हूँ
इस खातिर
मैं ही सुनती
बात सभी की
मैं ही पिटती
सास-ससुर
देवर-जेठानी
पति से
मैं ही घिसटती
सबसे ज्यादा
मैं ही शोषित
मैं ही शापित
आखिर क्यों?
हूँ सबसे ज्यादा?
क्यों सम
क्यों एकरस
नही हैं हम तुम?
नर-नारी
हैं हम अरु तुम
फिर क्यों
बन्धन अरु
लाँछन
हैं मेरी खातिर?
किस खातिर
में ही
पिसती हूँ?
घर हो
पिता का
या हो
पती का
सब मुझसे ही
लगाते
मुझपर ही सब
हुक्म चलाते
क्यों?
क्या मैं ही


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