कोई तो बतलाये दिनेश ध्यानी
सूनी पड़ी कलाई राखी बँधवायें किससे? कन्या पूजन पर कन्यायें लायें ढूँढ कहाँ से?
घर सूना आँगन है सूना पस-पड़ोस भी सूना नही चहकती दिखती कोई लड़की किसी के अँगना।
स्कूलों-बागों अरु झूलों में खेतों-खतिहानों गलियों में कम ही दिखती हैं कन्यायें आखिर ये क्या बात हो गई?
कन्यायें सब कहाँ खो गईं? हाल रहा गर आगे ऐसा फिर संसार चलेगा कैसे? कोई हमें बताये कोई हमें बताये।