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05.31.2008
 

समय
धवन भगत


समय बड़ा बलवान
कभी न रुकता
कभी न थकता
चलता गर्दन तान
समय के आगे शीश झुकाए
रहे न एक समान
नर हो या भगवान

बेशक उसकी शान निराली
भूल नहीं भोला है माली
यह है तेरी खांम खयाली
फूल के बदले फुलवाड़ी में
काँटे भी तो बो सकता है
ऐसा भी तो हो सकता है

जंगल धरती पर्वत सागर
भँवर में तरती जीवन गागर
गतिशील है तेरा सिरजन
काबा हो या फिर वृन्दावन
यही है तेरी शान
समय है तू बलवान
मुस्काता इतिहास रचाता
कभी कहीं तू ठहर न पाता
करे ना तू विश्राम
यही है तेरी शान


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