मीठी स्मृति धवन भगत
चंदन चमेली सी महक जब भी आए आत्म सात करे कड़वी स्मृति सीले मौसम की सुलगती अग्नि जब भी आए तन मन तडपाये स्मृति तो है एक रोशन द्वीप जब भी आए मन चमकाए