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जीवन है परेशान
मनुष्य है लेकिन महान
मशीन बन जो भागता है
लोह का बेटा
फौलाद बन गरमाये
लोहे पे हो के सवार
गिरे और संभले
निद्रा में लीन
जागे और पछताये
जीवन है परेशान
मन जो तन के भीतर
खंडित
मन में भावों का शमशान
चारों तरफ़ फैला शैतान
हृदयहीन और बुद्धिहीन
तिमिर के सब आधीन
जीवन संग जीवन संग्राम
लड़ना मरना टुकड़े होना
क्या खोया क्या पाया
समझ न आया
आहें भरना मार्ग तरना
क्या सोचा क्या पाया
मन परचाया
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