दिशा विहीन धवन भगत
धीरज हीन दुर्लभ मन निरपथ, पथ की ओर अपनी सुगंध अनुसार करता है प्रवास उदासी का पहन लिबास उदास चेहरे को अपने हाथों में छुपा अध जागे अध सोये अध जीवत अध मोये बोझ जीवन का ढोये मार्ग हीन दिशा विहीन