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08.23.2008
 

चिंता
धवन भगत


चिंता से भाग कर
कहाँ जायेंगे
भाग कर देखें
भागते भागते
हाँफ जायेंगे
आत्म संतोष के लिए
मुड़ कर झाँकें
वोह पीछे नहीं
हमसे भी प्रथम
हमारे आगे
नए परिवेश में
हमारी प्रतीक्षा में रत
मत भागो इस से
हर्ष से मिलें इसको
कभी आगे कभी पीछे
कभी हमारे भीतर
साथ न त्यागने वाला
अटूट प्रतिबिम्ब है यह


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