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05.31.2008
 

बाँसुरी
धवन भगत


मेरा अस्तित्व
फूँक दिये हैं प्राण
कर डाला कल्याण
बना के बाँसुरी

राग गाऊँ मल्हार
मन में बजे तरंगें
यह तेरा उपकार
तू है सिरजन हार
जाऊँ तेरे बलिहार

बाँस की पोरी
भीतर से है खाली खाली
न कोई पात न कोई डाली
हरि तेरी हरयाली
मेरी हस्ती तेरी शक्ति
तेरे संग ही भावे
मधुर हो जावे
सँग तेरे मेरी लौ लागी
हुआ मैं उज्जवल भागी


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