अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
09.06.2014


सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल

नाच रही हैं छत पर बूँदें पुरवा ने दी ताल
सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल

मेंढक मिलकर बिरहा गाते कोयल कजरी गाए
दुबक के बैठी है गोरैया कौवा शोर मचाए
दादी को लगती है बारिश अब जी का जंजाल
सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल

दिन में बारिश हुई झमाझम पानी बहता जाए
मोबाइल में बिज़ी है बचपन कश्ती कौन चलाए
टीवी देख रहे सब घर में सूनी है चौपाल
सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल

खेतों में घुटनों तक पानी उफन रहे हैं नाले
दलदल में फँस गया ट्रैक्टर बाहर कौन निकाले
बाँध के रस्सी खींच रहे हैं बैल हुए बेहाल
सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल

महँगू की गिर गई मड़ैया टूट के बरसा पानी
घर में बैठी सोच रही है रामधनी की नानी
कहाँ पड़ेगा झूला कट गई पीपल की वो डाल
सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें