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| 10.04.2008 |
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सच के लिये |
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क्या करना चाहिये ज़िन्दगी जीने के लिये कभी-कभी अंदाज़ ग़लत होता है ज़िन्दगी का ख़्वाब था कि छोटा-सा घर बनाये अपने लिए जिस दिन से बात चली है मक़सद पाने की मैं ग़लत हूँ या सही मेरी हक़ीक़त है देवमणि |
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