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10.04.2008
 

नहीं होती
देवमणि पांडेय
 


लोग कहते है सब कुछ ही है अपने अंदर
मन की शान्ति क्यों भीतर नहीं होती
ख़ुश रहना इतना कठिन नहीं है देवमणि
अपने अन्दर कोई अशान्ति जब नहीं होती

बरसों बहुत पीड़ा झेली है जीते जी हमने
पल-पल बेमतलब मरने की बातें नहीं होती
नामुमकिन नहीं उनका बदलना कोशिश से
नहीं तो छोटी सी बात यूँ बड़ी नहीं होती


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