देवमणि पांडेय

दीवान
क़तरे को इक दरिया समझा
कभी रातों को वो जागे...
बदल गई है लय जीवन की...
बदली निगाहें वक़्त की...
बेहतर है
डूब चुके कितने अफ़साने
नए मकां है....
नए साल की शुभकामनाएँ 
वक़्त के साँचे में ढल कर...
मायूस न हो ऐ दिल
सबसे दिल का हाल न कहना
कविता
सावन आया गाँव में सबका पूछ रहा है हाल
समीक्षा
कविता में कवि नरेंद्र मोदी का रचनात्मक सफ़र