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| 05.21.2007 |
| ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो देवी नागरानी |
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ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो समझ बूझ से तुम निभाकर तो देखो यह पुल प्यार का एक, नफ़रत का दूजा ये अन्तर दिलों से मिटाकर तो देखो गिराते हो अपनी नजर से जिन्हें तुम उन्हें पलकों पर भी बिठाकर तो देखो उठाना है आसान औरों पे ऊँगली कभी खुद पे ऊँगली उठाकर तो देखो न जाने क्या खोकर है पाते यहाँ सब मिलावट से खुद को बचाकर तो देखो न घबराओ देवी ग़मों से तुम इतना जरा इनसे दामन सजाकर तो देखो |
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