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| 05.21.2007 |
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या बहारों का ही ये मौसम नहीं देवी नागरानी |
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या बहारों का ही ये मौसम नहीं
स्वप्न आँखों में सजाया था कभी
हम बहारों के न थे आदी कभी
आशियाना दिल का है उजड़ा हुआ
जश्न खुशियों का भी अब बेकार है
मौत का क्यों ख़ौफ़ ‘देवी’ दिल में हो |
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