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| 05.21.2007 |
| तेरी रहमतों में सहर नहीं देवी नागरानी |
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तेरी रहमतों में सहर नहीं मेरी बंदगी में असर नहीं? जिसकी रहे नेकी निहाँ कहीं कोई ऐसा बशर नहीं? जिसे धूप दुख की न छू सके कोई ऐसा दुनियाँ में घर नहीं? तन्हाई, साया साथ है बेदर्द खुशियाँ मगर नहीं। जिसे लोग कहते हैं ज़िंदगी देवी इतनी आसां सफ़र नहीं। |
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