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| 05.21.2007 |
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सबका मन अपना दुश्मन है देवी नागरानी |
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सबका मन अपना दुश्मन है
ख़ुश्क मिजाज़ों से यूँ मिलना
जब
दुख ही दुख का मद्दावा
जिसके लिये औरो से लड़ी
जो
ग़ैरों को अपना कर ले
जो
फूलों सा महके देवी |
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