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| 03.23.2008 |
| मैं तो साहिल पे आकर रहा डूबता देवी नागरानी |
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मैं तो साहिल पे आकर रहा डूबता दाग दिल पर लगा वो नहीं छूटता ग़म की कश्ती किनारे पे ले आई है खुशनुमा दिल सहारा है क्यों ढूँढता? चलके नक्शे कदम पर सफ़र तय करूँ नक्शे पा घट में कब तक रहूँ ढूँढता चैन से बैठ सकता नहीं आदमी फिक्रे दुनियाँ लिये है सदा घूमता है ख़यालों के जँगल में देवी घिरी थाम ले हाथ तुझको खुदा वास्ता |
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