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| 06.08.2007 |
| कितने पिये है दर्द के,
आँसू बताऊँ
क्या (चराग़े-दिल - साभार) देवी नागरानी |
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कितने पिये है दर्द के, आँसू बताऊँ क्या ये दास्ताने-ग़म भी किसी को सुनाऊँ क्या? रिश्तों के आईने में दरारें हैं पड़ गईं अब आईने से चेहरे को अपने छुपाऊँ क्या? दूश्मन जो आज बन गए, कल तक तो भाई थे मजबूरियाँ हैं मेरी, मैं उनसे छुपाऊँ क्या? चारों तरफ से तेज़ हवाओं में हूँ घिरी इन आँधियों के बीच में दीपक जलाऊँ क्या? दीवानगी में कट गए मौसम बहार के अब पतझड़ों के खौफ से दामन बचाऊँ क्या? साजि़श मेरे ख़िलाफ मेरे दोस्तों की थी इल्ज़ाम दुशमनों पे मैं ‘देवी’ लगाऊँ क्या? |
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