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| 01.15.2008 |
| अब ख़ुशी की हदों के पार
हूँ मैं देवी नागरानी |
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अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं
दर्द पिघला है अश्क़ बार हूँ मैं। गीत कैसे न सुर में ढल जाते दोस्तो साज़े दिल का तार हूँ मैं। जिसने पी है तेरी निगाहों से जो न उतरे वही खुमार हूँ मैं। जिनको माँगे बिना मिले आँसू उन्हीं लोगों में अब शुमार हूँ मैं। जिससे घायल नहीं हुआ कोई मोम की एक बस कटार हूँ मैं। |
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