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ISSN 2292-9754

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03.19.2018


 ‘एक थका हुआ सच’ मानवता की हृदय-विदारक चीख
सिंध कराची की लेखिका अतिया दाऊद के कवितायें
:सिंधी से हिंदी अनुवाद : देवी नागरानी
(सिन्धी काव्य का हिन्दी अनुवाद-2016)

38.
खोटे बाट

मज़हब की तेज़ छुरी से
कानून का वध करने वालो
तुम्हारा कसाई वाला चलन
अदालत की कुर्सी पर बैठे लोग
तुम्हारी तराजू के पलड़ों में खोट है
तुम्हारे समूरे बाट खोटे हैं
तुम जो हमेशा मज़हब के अंधे घोड़े पर सवार
फ़तह का परचम फहराते रहते हो
क्या समझते हो? औरत भी कोई रिसायत है
मैं ऐसे किसी भी ख़ुदा, किसी भी किताब
किसी भी अदालत, किसी भी तलवार को नहीं मानती
जो आपसी मतभेद की दुश्मनी में
छुरी की तरह मेरी पीठ में खोंप दी गई है
क़ानून की किताबें रटकर डिगरी की उपाधि सजाने वाले
मेरे वारिस भी तो तुम जैसी मिट्टी के गूँथे हुए हैं
किसी को रखैल बना लें,
रस्म के नाम पर ऊँटनी बना लें
ग़ैरत के नाम पर ‘कारी’ करके मार दें
किसी को दूसरी, तीसरी और चौथी बीवी बनाएँ
तुम्हारी तराजू के पलड़े में मैं चुप रहूँ
ख़ला में झूलती रहूँ
एक पलड़े में तुम्हारे हाथों ठोकी रीतियों, मज़हब
जिन्सी मतभेद के रंगीन बाट डाले हैं
दूसरे पलड़े में मेरे जिस्म के साथ तुम्हें साइन्सी हक़ीक़तें
मेरी तालीम और शऊर के बाट इस्तेमाल करने होंगे
तुम्हें अपने फैसले बदलने होंगे!

20.
नया समाज

मेरे पिटारे में खोटा सिक्का डालते हुए
टेढ़ी आँख से क्या देखते हो?
मुहब्बत और भूख, दोनों अंधी होती हैं
उनकी डोर तुम्हारे हाथ में है
जैसे चाहो, अपनी उंगली पर नचा सकते हो
मेरी ज़रूरत तुम्हारे पास गिरवी है
सो चाहो तो बबूल की झाड़ी भी खिला सकते हो
बूँद-बूँद ज़हर तमाम उम्र मुझे पिला सकते हो
मुट्ठी भर मुहब्बत एक बार देकर
बाद में ऊँट की तरह कितना भी सफ़र करा सकते हो
नज़रें मिलाते हुए कतराते क्यों हो?
‘दुख’ और ‘इन्तज़ार’ दोनों गहरे होते हैं
और उनकी नब्ज़ तुम्हारे हाथ में है
इसलिये जितना चाहो इलाज में विलम्ब कर सकते हो
चुपचाप नज़रें झुकाकर तुम्हारे पीछे चलती
दुल्हन की बागडोर तुम्हारे बस में है
जहाँ चाहो मोड़ सकते हो।
बेजान मूर्ति की तरह तेरे शोकेस की ज़ीनत बनूँ
मेरे हिस्से का जीवन भी तुम गुज़ारते हो
रोज़ उभरता सूरज मुझे आस बंधाता है
हमेशा ऐसे होने वाला नहीं
आँखों में आँखें डालकर आख़िर तो पूछूँगी
कि ‘मुझे इस तरह क्यों घसीट रहे हो?’
इससे पहले कि मेरी हिम्मत भीतर से नफ़रत बनकर फूटे
आओ तो मिलकर ये समूरे फासले जड़ों से उखाड़ फेंकें
बराबरी की बुनियाद पर नए समाज के बूटे बोयें!

देवी नागरानी जन्म:

1941 कराची, सिंध (पाकिस्तान), 8 ग़ज़ल-व काव्य-संग्रह, (एक अंग्रेज़ी) 2 भजन-संग्रह, 8 सिंधी से हिंदी अनुदित कहानी-संग्रह प्रकाशित। सिंधी, हिन्दी, तथा अंग्रेज़ी में समान अधिकार लेखन, हिन्दी- सिंधी में परस्पर अनुवाद। श्री मोदी के काव्य संग्रह, चौथी कूट (साहित्य अकादमी प्रकाशन), अत्तिया दाऊद, व् रूमी का सिंधी अनुवाद. NJ, NY, OSLO, तमिलनाडू, कर्नाटक-धारवाड़, रायपुर, जोधपुर, महाराष्ट्र अकादमी, केरल, सागर व अन्य संस्थाओं से सम्मानित। साहित्य अकादमी / राष्ट्रीय सिंधी विकास परिषद से पुरुसकृत।
पता: 480 W Surf Street, Elmhurst IL 60126, USA/dnangrani@gmail.com


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