दीप्ति शर्मा

कविता
आवाज़
इच्छाएँ
कीमत
कुबड़ी आधुनिकता
कैनवास
ख़ामोशी
खुरचे हुए शब्द
चित्र
तुम और मैं
दंश
दमित इच्छा
धुरी
पोटली
मच्छर
वो
हाँ मैं दलित स्त्री हूँ
हे पार्थ!