अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
07.09.2008
 

फागुनी बयार (हाईकू)
दीपिका सगटा जोशी 'ओझल'


सकुचि बैठी
सखियन के संग
मोहे बुला लो

जिया कहे ये
पिया उठाओ मोरे
घूँघट पट

गले लगा लो
फागुनी बयार हूँ
मैं नटखट


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें