घूँघट खोलती हूँ मैं दीपिका सगटा जोशी 'ओझल'
नही सामर्थ्य नैनों में खुशी को व्यक्त जो कर दें शब्द है खोजने मुश्किल मुझे अभिव्यक्त जो कर दें अबोली बन के बावरिया मगन मन डोलती हूँ मैं वक्त को थाम लो पल भर कि घूँघट खोलती हूँ मैं मेरे नादान शब्दों को नहीं आया जो बतलाना समझने का जतन करना नैन से बोलती हूँ मैं वक्त को थाम लो पल भर कि घूँघट खोलती हूँ मैं