अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
12.30.2007
 

असंतोष के सिंह तुम माँद में रहो
दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'


असंतोष के सिंह तुम माँद में रहो
तुम्हारे लिए किये इतने सारे इंतज़ाम
हम सुनाते हैं तुम सुनो
हम दिखाते हैं तुम देखो
पर तुम अपने होंठ सिलकर रहो
जो हम करते हैं वह सहो
टीवी पर तुम्हारे लिए किया हैं इंतज़ाम
करना नहीं हैं तुमको कोई काम
गीत और नृत्य देखते रहो
मनोरंजन के कार्यक्रम जंग की तरह सजाये हैं
हम जानते हैं देव-दानवों के द्वन्द्वों के
दृश्य हमेशा तुम्हारे मन को भाये हैं
घर में ही मैदान का मजा दिलाने के लिए
एसएमएस का किया है इंतज़ाम


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें