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03.08.2008
 

नयन बावरे गए आज भर
दीपा जोशी


नयन बावरे गए आज भर
पल में छलकी
गागर गहरी
पल में बेसुध
भए सजल

नयन बावरे गए आज भर
कभी सकुचे
पलकों के लघु तन
कभी ताके
असीम गगन

नयन बावरे गए आज भर
तड़ित घन के
प्रज्ज्वलित अंग सा
सिहर उठे
व्याकुल तन

नयन बावरे गए आज भर
कामनाओं के
कम्पन से
डोल रहा
एकाकी मन

नयन बावरे गए आज भर
पिया पिया के
मुखरित स्वर से
चहुँ दिशाएँ
गूँजे एक संग


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