बैरी उर दीपा जोशी
बीते युग पल-पल, गिन-गिन, शिथिल हुई हर श्वास धड़क उठा बैरी उर फिर सुनकर किसकी पदचाप ?
बह गया रिम-झिम, रिम-झिम, गहन घन-संताप सजल हुआ बैरी उर फिर सुनकर क्यूँ मेघ मल्लार ?
बुझ गए झिल-मिल, झिल-मिल, कामनाओं के दीप धधक उठा बैरी उर फिर सुनकर क्यूँ मिलन गीत ?