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| 11.21.2008 |
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अभंगित मौन |
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मूक होकर मौन धारण करूँ कब तक, डर है तुमको झँझावातोँ से तुम अभी कोमल प्रवाहिनी हो मूक होकर मौन धारण करूँ कब तक . |
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