चाँद शुक्ला हदियाबादी


दीवान

अम्बर धरती उपर नीचे ...
कच्चा पक्का मकान था अपना
किस तरह ख़ाना ख़राबां ...
खुशबुओं की तरह महकते गए
जब पुराने रास्तों पर से
छुप के आता है कोई ...
तुझे दिल में बसाना चाहता हूँ
धुँधली धुँधली किसकी है
मेरे गीतों मेरी ग़ज़लों को
साँप की मानिंद वोह....
हम खिलौनों की ख़ातिर ...