अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
05.04.2015


कण्डक्टर

खचाखच भरी बस में खड़े होने तक को जगह न थी, जैसे-तैसे मंज़िल तक पहुँचने की धुन में लोग खड़े, बैठे जैसे भी बन रहा था यात्रा कर रहे थे।

ऐसे में कण्डक्टर ने जेब से सिगरेट निकाली व धुएँ का एक छल्ला उछाल दिया, जो बस में लिखी "धूम्रपान निषेध है" की चेतावनी से जा टकराया।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें