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| 10.06.2007 |
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माथे पे बिंदिया चमक रही डॉ. भावना कुँअर |
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माथे पे बिंदिया चमक रही
शर्माते से इन गालों पर
खन-खन से करते कॅगन की
है नये सफ़र की तैयारी |
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