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ISSN 2292-9754

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03.31.2015


हैप्पी बर्थडे

"मेनी मेनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ़ द डे बेबी बिटिया, जन्मदिन मुबारक हो," बिस्तर पर लेटी बेबी को प्यार से गोदी में लेते हुए उसकी माँ ने कहा। बेबी कुनमुनाई और माँ के गले में अपनी बाँहे डालकर उससे लिपट गई। मम्मा, आपने प्रॉमिस किया था, "मेरी बार्बी डॉल .."

"अरे सब कुछ मिलेगा बिटिया, बिस्तर से बाहर तो आओ, चलो जल्दी से।" बेबी ने आँखें खोलीं और अलसाते हुए बिस्तर से बाहर निकली। बाहर निकलते ही कमरा हैप्पी बर्थडे बेबी बिटिया की गूँज से गूँज उठा।

बेबी ने देखा तो वहाँ पापा, दादी, बुआ, भैया सब खड़े थे, सबके हाथ में उपहार थे, उसके मनपसंद खिलौने । वह खुशी से झूम उठी। हरेक ने उसे गोदी में उठाया, प्यार किया और उपहार दिए । तरह-तरह के खिलौने और कपड़े... बुआ सुन्दर ड्रेस लाई थी, पापा रिमोट वाली कार, दादी के हाथ में चॉकलेट के डिब्बे थे और भैया के हाथ में बार्बी डॉल। बेबी झूम उठी थी।

"चलो, जल्दी-जल्दी तैयार हो जाओ, कल की पार्टी के लिए कुछ खरीदारी करनी है और ...," भैया उत्साह से बोला।

"हाँ, और लौटते समय आइसक्रीम भी खानी है," ..बेबी ख़ुश होकर बोली।

अपनी अलमारी में खिलौने जमाते-जमाते बेबी के हाथ में एक गुडिया आई।

"माँ, ये गुड़िया तो पुरानी हो गई है, क्या इसे लाली को दे दूँ?"

"हाँ, दे दो!" माँ ने रसोई से जवाब दिया था।

लाली एक कोने में सिकुड़ी-सिमटी खड़ी थी। बेबी ने गुड़िया उसकी और उछाल दी। गुड़िया पाते ही लाली की ख़ुशी की सीमा न रही। वह भागी-भागी घर गई। गुड़िया का एक हाथ कंधे से अलग हो रहा था, उसपर धागे से टाँका लगा दिया। बस्ती के बच्चे लाली के पास जमा हो गए।

"एक बार मुझे भी हाथ लगाने दो न गुड़िया को," सबके मन में उस महँगी गुड़िया को देखकर उसे छूने की आकांक्षा प्रबल हो चली थी।

"लाली, सच बता, बेबी ने ये गुड़िया तेरे को क्यों दी?" कमली पूछ बैठी।

"अरे, आज मेरा हैप्पी बरडे था न, तभी तो मैं माँ के साथ गई थी...मुझे पता था कि .."

लाली खुद से हँस दी थी अपने कुशल झूठ पर ।


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