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| 11.05.2007 |
| आस्था भगवत शरण श्रीवास्तव "शरण" |
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आओ हम दीपक जलायें आओ हम दीपक जलायें आस का विश्वास का। आज भी रावण यहाँ है आओ हम दीपक जलायें
आस का विश्वास का। आओ हम दीपक जलायें
आस का विश्वास का। आओ हम दीपक जलायें
आस का विश्वास का। |
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