कभी पूछा है चाँद से
इतने उदास क्यों हो...
अपनों के बीच में अनजाने क्यों हो?
क्या है जो रोक के रक्खे है तुम्हें
इस तरह सबसे मुँह मोड़े क्यों हो?
कोई दुश्मन नहीं तो किससे लड़ रहे हो?
खुद से नाराज़ हो तो मना लो ना दिल को!
कल शायद तुम ये जगह,
ये लोग छोड़ दो,
कम से कम यादों के लिये तो जी लो इस पल को।
जो हो न सका उसके लिये किसको दोष दो,
जो हो सकता है उसके लिये तो सम्भालो चाँद को।
कभी पूछा है चाँद से,
इतने उदास क्यों हो...?
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