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04.07.2007

प्यार की परिभाषा क्या?
अँशु शर्मा

इस परिभाषा को मेरा मन पुकार उठा
क्या यही प्यार है
?

जब कलियों का भँवरों ने रस है सोख लिया,
जब बिजली ने बादल के दिल में स्थान लिया
,
सीप में स्वाति से मोती उत्पन्न हुआ -
या अंगारों ने पतंगे को जला दिया।
नहीं - नहीं ये तो प्रकृति का सार है।।

मानव का मानव के प्रति ये प्यार देखिए,
काम माया में फँसता प्राणी मात्र देखिए
,
वासना से सोया संसार देखिए
,
अरे नहीं ये तो माया की मानव पर मार है।।

झरते झरनों का मधुर संगीत,
लहराती नदिया छलकाती प्रीत
,
प्रीति की सूचक सूर्य-किरण
,
मिलन की मीठी सी सिरहन।
सबसे अनुपम सागर और नदिया का प्यार है।।

सागर के हृदय ही से खींच अम्बर ने जीवन सौंदर्य-
धरती का आँचल सजा दिया।
फूलों में फूट पड़ा है प्यार
,
वसुधा पर छाई मधुर बहार।
नाच उठा मन मेरा कहकर यही प्यार है।।

सबसे निश्छल सबसे मूक प्यार है जिसका
सबसे उत्तम सबसे निर्मल प्यार है उसका।
प्यार काम से उच्च है पवित्र जलना सिखलाए जो
कुछ न कहे मौन रह कर सह जाए जो
ऐसा प्यार ही जीवन का सार है।।