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04.07.2007

घट का आकाश
अँशु
शर्मा

घट का आकाश अपनी सारी शक्ति लगा कर चिल्लाया
मैं अकेला हुआ
अकेला ही रहूँगा
मेरा अस्तित्व अपना है

तभी एक ठोकर लगी
घट का आकाश
बिखर गया
बह गया
जिसका अंश था उसी में मिल गया