| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 11.22.2007 |
|
हो ऐसी बारिश |
|
जागे सोया प्यार, हो ऐसी बारिश
पानी में लगे आग, हो ऐसी बारिश। बीच खड़ी दीवारें, सारी ढह जाएँ दिल से दिल मिले, हो ऐसी बारिश। छोड़ दुश्मनी बरसों की, गले मिलो बहे आँखों से पानी, हो ऐसी बारिश। मन का मैल धुले, सब के दिल से प्यार में हो सब तर, हो ऐसी बारिश। भूखा-प्यासा न हो, कोई भी प्राणी पानी संग बरसे दाना, हो ऐसी बारिश। बैठा हताश हो जो भी, अपने सफ़र में खिले आस की कोंपल, हो ऐसी बारिश। खुशियों के बादल गरजे, घर-आँगन में नाचें मन का मोर, हो ऐसी बारिश। |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|